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शनिवार, 12 मई 2012

अम्बेडकर के इस कार्टून में ऐसा क्या है, जिसपर बवाल मचा हुआ है.संविधान के लागू होने के पहले क़ा यह कार्टून मशहूर कार्टूनिस्ट शंकर क़ा है. उस समय के तत्कालीन नेताओ को इस कार्टून पर आपत्ति नहीं थी.अम्बेडकर भी उस समय थे. संविधान बनने में हो रही देरी के बारे में सब भारतीय जानना चाहते थे.देश को स्वतंत्र हुए कुछ ही दिन हुए थे.संविधान बनाने में कई आपत्तियां थी.इसलिए देरी हो रही थी.घोंघा पर बैठे अम्बेडकर आखिर क्या कर सकते थे.घोंघा की चाल सब जानते है.नेहरु गुस्से में घोंघा को मारकर उसकी गति बढ़ाना चाहते है..मायावती को इतने दिन बाद इस कार्टून की सुध क्यों आई? जब वह कही नहीं है, तो इस कार्टून के माध्यम से अपने को लोगो के बीच बनाये रखना चाहती है.वैसे भी मायावती कितना भी कर ले, घोटालों से उनका पीछा छूटने वाला नहीं है. यहाँ पर यही बात समझ में आती है कि, अम्बेडकर और मायावती के सरोकारों में बहुत अंतर है...

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